मौलाना जहिर अब्बास और रिशतेदारो की कोशिश से सादगी से निकहा
परभणी ( काजी फहिम) मुसलमानो मे शादियो का मामला संगीन होता जा रहा है.आपस मे लेनदन और जहेज (हुंडा ) की लानत ने इस को और मुश्किल बना दिया. हलां के निकहा और जुमा के खुदबात मे निकहा को सादगी से करनेके ओर तवजा दिलाई जा रही है.पर अमलंन लोग इस तरफ पेश कदमी नही कर रहे है. जिस की वजहा से गरिब लडकियो की शादियोंमे मुशकिलात की शिकार हो रही है.चंद लोग है जो सुनत पर अमल करते है. इतला के मुताबेख परभणी के मशहुर एंव मारुफ आलमे दिन मौलाना जहिर अब्बास कासमी के भांडे अब्दुल बासीत खान के रिशतेदार औरंगाबाद के बरी बाग इलाके मे लडकी को देखने के बाद आपस मे त्ये किया के तुरंत सादगी के साथ बगैर लेन देन के निकाह कर लीया जाए. असर कि नमाज के पहेले रिशता त्ये हुवा और इशा के बाद निकहा हुवा.इस निकहा की तकरिब मे मौलाना मोहम्मद नसीमोदिन मफताई ने अखद का कारवाई पुरी की.जब के मौलाना मो. मोईजोदिन कास्मी ने निकाहा की सादगी पर खिताब किया. मौलाना महेफुज रहेमान फारुखी ने खुतबा निकाह पढाया.मौलाना जहिर अब्बास कास्मी ने दुओ की.इस निकहा कि तकरिब को अंजाम देने के लिये मौलाना के बहेंनवी दुल्हा के वालेद, जाजा,दिगर रिशतेदारो ने कोशिश की.इस मौके पर मौलाना फारुख इशाती,हाफेज एकबाल अन्सारी,हाफेज सऊद,मौलाना मोहम्मद निजामोदिन मिली और इतर उलमाओअं के अलावा करीबी रिशतेदार शरिक थै.उन्हो ने दुल्हा दुल्हन के खुशगवार जिंदगी के लिए दुओ और रिशतेदारो को मुबारक बाद दी.